आज कल हम बहुत याद करते है अपने आप को
ऐसे पहले कुछ ख़ास से नहीं थे पर उस आम मे भी बहुत कुछ ख़ास था!
समझदार भी नही थे पर नासमझी मे भी बहुत सारा ज्ञान था!
पहले भी इतने ही शांत थे पर खामोशी मे भी सपनो का शोर था!
बोलते पहले भी कम ही थे पर उसमे सच्चाई की परछाई थी!
दोस्त उस समय भी थे और आज भी है पर मिलने और बात करने के लिए बहाने की जरूरत नही पड़ती थी!
काम उस समय कुछ भी नही था पर आराम से बैठने की फुर्सत भी नही थी!

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